One Source Sangha को बेहतर अनुभव के लिए इंस्टॉल करें

धम्मपद 17.11

जीभ के क्रोध से सावधान रहो, और अपनी जीभ पर नियंत्रण रखो! जीभ के पापों को छोड़ो, और अपनी जीभ से पुण्य का अभ्यास करो!

अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881)। स्रोत

Ananda के साथ इस श्लोक पर चिंतन करें

यह श्लोक आपमें क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — Ananda कई परंपराओं से लेता है और आपके अपने पथ का सम्मान करता है।

हमारे साथ चलें

प्रत्येक रविवार एक मार्ग, एक प्रश्न। कुछ और नहीं, कभी नहीं।

🌐 English  ·  हिन्दी