बेहतर अनुभव के लिए One Source Sangha स्थापित करें

धम्मपद 16.7

प्रेम से दुःख आता है, प्रेम से भय आता है; जो प्रेम से मुक्त है, वह न तो दुःख जानता है और न भय।

अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881)। स्रोत

Ananda के साथ इस श्लोक पर विचार करें

यह श्लोक आपमें क्या जगाता है? कोई भी प्रश्न पूछें — Ananda कई परंपराओं से ज्ञान लेते हैं और आपके अपने पथ का सम्मान करते हैं।

हमारे साथ चलें

एक मार्ग, एक प्रश्न, हर रविवार। कुछ और नहीं, कभी नहीं।

🌐 English  ·  हिन्दी