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धम्मपद 15.1

आइए हम सुख से रहें, उन लोगों से घृणा न करें जो हमसे घृणा करते हैं! जो लोग हमसे घृणा करते हैं, उनके बीच हम घृणा मुक्त रहें!

अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881)। स्रोत

इस श्लोक पर आनंद के साथ चिंतन करें

यह श्लोक आपके मन में क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से प्रेरणा लेते हैं और आपके अपने पथ का सम्मान करते हैं।

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