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धम्मपद 13.4

दुनिया को बुलबुले के रूप में देखो, इसे मरीचिका के रूप में देखो: जो व्यक्ति दुनिया को इस तरह नीचे देखता है, उसे मृत्यु का राजा नहीं देखता है।

अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881). स्रोत

आनंद के साथ इस श्लोक पर विचार करें

यह श्लोक आपके अंदर क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से आते हैं और आपके अपने मार्ग को सम्मान देते हैं।

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