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धम्मपद 12.6

जिसकी दुष्टता बहुत बड़ी है, वह स्वयं को उस अवस्था में ले जाता है जहाँ उसका शत्रु उसे चाहता है, जैसे एक लता उस पेड़ को घेरकर करती है।

अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881)। स्रोत

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