एक बेहतर अनुभव के लिए One Source Sangha को इंस्टॉल करें

धम्मपद 12.2

प्रत्येक मनुष्य को पहले अपने आप को जो उचित है उसके लिए निर्देशित करना चाहिए, फिर दूसरों को सिखाए; इस प्रकार एक बुद्धिमान व्यक्ति दुःख नहीं उठाएगा।

अंग्रेजी अनुवाद: एफ. मैक्स मुलर (1881)। स्रोत

Ananda के साथ इस श्लोक पर विचार करें

यह श्लोक आपके मन में क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — Ananda कई परंपराओं से खींचता है और आपके अपने मार्ग का सम्मान करता है।

हमारे साथ चलें

एक मार्ग, एक प्रश्न, हर रविवार। कुछ और नहीं, कभी नहीं।

🌐 English  ·  हिन्दी