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धम्मपद 11.10

जिन लोगों ने उचित अनुशासन का पालन नहीं किया है, और अपनी युवावस्था में धन नहीं अर्जित किया है, वे टूते हुए धनुष की तरह लेटे हुए हैं, अतीत के लिए आह भरते हैं।

अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881)। स्रोत

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यह श्लोक आपमें क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से आकर्षित करते हैं और आपके अपने पथ का सम्मान करते हैं।

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