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धम्मपद 11.1

यहाँ हँसी कहाँ है, यहाँ आनंद कहाँ है, जब यह संसार सदा जल रहा है? जब तुम अंधकार से घिरे हो, तो क्या तुम प्रकाश की खोज नहीं करते?

अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881)। स्रोत

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