बेहतर अनुभव के लिए One Source Sangha इंस्टॉल करें

धम्मपद 10.17

जल-निर्माता पानी को (जहाँ वह चाहते हैं) ले जाते हैं; तीर-बनाने वाले तीर को मोड़ते हैं; बढ़ई लकड़ी को मोड़ते हैं; अच्छे लोग अपने आप को गढ़ते हैं।

अंग्रेजी अनुवाद: एफ. मैक्स मुलर (1881)। स्रोत

Ananda के साथ इस श्लोक पर विचार करें

यह श्लोक आपके अंदर क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — Ananda कई परंपराओं से प्रेरणा लेते हैं और आपके अपने पथ का सम्मान करते हैं।

हमारे साथ चलें

हर रविवार एक मार्ग, एक प्रश्न। कुछ और नहीं, कभी नहीं।

🌐 English  ·  हिन्दी