बेहतर अनुभव के लिए One Source Sangha इंस्टॉल करें

धम्मपद 1.2

हम जो कुछ भी हैं वह हमारे विचारों का परिणाम है: यह हमारे विचारों पर आधारित है, यह हमारे विचारों से बना है। यदि कोई व्यक्ति शुद्ध विचार के साथ बोलता या कार्य करता है, तो सुख उसका अनुसरण करता है, जैसे एक छाया जो कभी नहीं जाती।

अनुवाद: एफ. मैक्स मुलर (1881)। स्रोत

आनंद के साथ इस श्लोक पर विचार करें

यह श्लोक आपमें क्या जागृत करता है? कोई भी प्रश्न पूछें — आनंद कई परंपराओं से ज्ञान लेते हैं और आपके अपने पथ का सम्मान करते हैं।

हमारे साथ चलें

एक अंश, एक प्रश्न, हर रविवार। कुछ और नहीं, कभी नहीं।

🌐 English  ·  हिन्दी