बेहतर अनुभव के लिए One Source Sangha इंस्टॉल करें

भगवद गीता 14.13

अप्रकाशोऽप्रवृत्तिश्च प्रमादो मोह एव च | तमस्येतानि जायन्ते विवृद्धे कुरुनन्दन ||१४-१३||
aprakāśo.apravṛttiśca pramādo moha eva ca . tamasyetāni jāyante vivṛddhe kurunandana ||14-13||
अंधकार, जड़ता, असावधानी और भ्रम — ये सब तमस के प्रधान होने पर उत्पन्न होते हैं, हे अर्जुन।

अंग्रेजी अनुवाद: स्वामी शिवानंद (1942) · नीचे दिए गए शब्द अर्थ समान स्रोत से। स्रोत

14.13 अप्रकाशः अंधकार? अप्रवृत्तिः जड़ता? च और? प्रमादः असावधानी? मोहः भ्रम? एव भी? च और? तमसि तमस में? एतानि ये? जायन्ते उत्पन्न होते हैं? विवृद्धे प्रधान हुआ हो? कुरुनन्दन हे कुरु वंश के वंशज (अर्जुन)। टिप्पणी जब तमस बढ़ता है, तो अंधकार, कुछ न करने की इच्छा, अपने कर्तव्यों का विस्मरण और भ्रम का जन्म होता है। अंधकार विवेक की कमी। अप्रवृत्ति जड़ता, अत्यधिक निष्क्रियता। प्रमाद (असावधानी) और मोह (भ्रम) अंधकार के प्रभाव हैं। ये वे विशेषताएं हैं जो दर्शाती हैं कि तमस प्रधान है। तमस आध्यात्मिक प्रगति और जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता में बहुत बड़ी बाधा है। इसे हर कीमत पर नष्ट किया जाना चाहिए। लोग तमस को सत्व या शांति समझने की गलती करते हैं। वे तामसिक व्यक्ति को मौन योगी मानते हैं। सब कुछ प्रारब्ध है, सब माया है, कोई संसार नहीं, मुझे क्यों काम करना चाहिए, काम मुझे बाँधेगा, मैं ब्रह्म हूँ। यह आध्यात्मिकता नहीं है बल्कि खालिस और गहरा तमस है।

इस श्लोक पर Ananda के साथ चिंतन करें

यह श्लोक आपके अंदर क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — Ananda कई परंपराओं से प्रेरणा लेता है और आपके अपने मार्ग को सम्मान देता है।

हमारे साथ चलें

एक मार्ग, एक सवाल, हर रविवार। और कुछ नहीं, कभी नहीं।

🌐 English  ·  हिन्दी