अर्जुन ने कहा - हे कृष्ण, दोनों सेनाओं के बीच मेरे रथ को खड़ा करो, ताकि मैं उन लोगों को देख सकूँ जो यहाँ लड़ने की इच्छा से खड़े हैं, और जान सकूँ कि जब युद्ध शुरू होने वाला है, तो मुझे किससे युद्ध करना है।
अनुवाद: स्वामी शिवानंद (1942) · नीचे दिए गए शब्द अर्थ एक ही स्रोत से हैं। स्रोत
1.21 -- 1.22 सेनयोः सेनाओं के? उभयोः दोनों के? मध्ये बीच में? रथम् रथ? स्थापय खड़ा करो? मे मेरा? अच्युत हे अच्युत (हे अपरिवर्तनीय, कृष्ण)? यावत् जबतक? एतान् इन? निरीक्षे देख? अहम् मैं? योद्धुकामान् लड़ने की इच्छा वाले? अवस्थितान् खड़े? कैः किससे? मया मुझसे? सह साथ? योद्धव्यम् युद्ध करना होगा? अस्मिन् इस? रणसमुद्यमे युद्ध के समय।कोई टिप्पणी नहीं।
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1.21 -- 1.22 सेनयोः सेनाओं के? उभयोः दोनों के? मध्ये बीच में? रथम् रथ? स्थापय खड़ा करो? मे मेरा? अच्युत हे अच्युत (हे अपरिवर्तनीय, कृष्ण)? यावत् जबतक? एतान् इन? निरीक्षे देख? अहम् मैं? योद्धुकामान् लड़ने की इच्छा वाले? अवस्थितान् खड़े? कैः किससे? मया मुझसे? सह साथ? योद्धव्यम् युद्ध करना होगा? अस्मिन् इस? रणसमुद्यमे युद्ध के समय।कोई टिप्पणी नहीं।