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भगवद् गीता 1.10

अपर्याप्तं तदस्माकं बलं भीष्माभिरक्षितम् | पर्याप्तं त्विदमेतेषां बलं भीमाभिरक्षितम् ||१-१०||
aparyāptaṃ tadasmākaṃ balaṃ bhīṣmābhirakṣitam . paryāptaṃ tvidameteṣāṃ balaṃ bhīmābhirakṣitam ||1-10||
"हमारी यह सेना भीष्म द्वारा संचालित अपर्याप्त है, जबकि उनकी सेना भीम द्वारा संचालित पर्याप्त है।

अंग्रेजी अनुवाद: स्वामी शिवानंद (1942) · नीचे शब्दों के अर्थ समान स्रोत से। स्रोत

1.10 अपर्याप्तम् अपर्याप्त? तत् वह? अस्माकम् हमारी? बलम् सेना? भीष्माभिरक्षितम् भीष्म द्वारा संचालित? पर्याप्तम् पर्याप्त? तु जबकि? इदम् यह? एतेषाम् उनकी? बलम् सेना? भीमाभिरक्षितम् भीम द्वारा संचालित।व्याख्या इस श्लोक की व्याख्या विभिन्न टीकाकारों द्वारा भिन्न-भिन्न तरीकों से की गई है। श्रीधर स्वामी अपर्याप्तम् शब्द का अर्थ अपर्याप्त लेते हैं। आनंद गिरि इसका अर्थ असीम लेते हैं।

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यह श्लोक आपके मन में क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से आहरण करते हैं और आपके अपने मार्ग का सम्मान करते हैं।

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