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योग सूत्र 1.41

जब मन के सभी विक्षेप शांत हो जाते हैं, तब चेतना एक शुद्ध क्रिस्टल की तरह, जिस भी चीज़ पर टिकी होती है, उसका रंग ग्रहण कर लेती है — चाहे वह द्रष्टा हो, दर्शन हो, या दृश्य हो।

अंग्रेजी अनुवाद: चार्ल्स जॉनसन (1912) · नीचे दिए गए शब्दों के अर्थ उसी स्रोत से हैं। स्रोत

यह पिछले सूत्र का एक अधिक पूर्ण विस्तार है, और इतना स्पष्ट है कि टिप्पणी इसमें कुछ जोड़ नहीं सकती। सब कुछ या तो द्रष्टा है, दर्शन है, या दृश्य है; या जैसा कि हम कह सकते हैं, चेतना, शक्ति, या पदार्थ। ऋषि हमें बताते हैं कि एक ही कुंजी तीनों के रहस्य को खोलेगी — चेतना, शक्ति और पदार्थ के रहस्य। विचार यह है कि एक कोमल हृदय की सहानुभूतिपूर्ण समझ, जो दूसरों के हृदय को सहज ही समझती है, वास्तव में उसी शक्ति की अभिव्यक्ति है जैसी वह गहन संवेदनशील बोध जिससे कोई ग्रहों की गति या परमाणु संरचना के रहस्य को जान लेता है।

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यह सूत्र आपके मन में क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — Ananda कई परंपराओं से खींचता है और आपके अपने पथ को सम्मानित करता है।

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