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ताओ ते चिंग 76.3

इसलिए जो (अपनी) ताकत के बल पर निर्भर करता है वह विजय नहीं पाता; और जो वृक्ष मजबूत होता है वह फैली हुई भुजाओं को भर देता है, (और इससे लकड़हारे को आमंत्रण मिलता है।)

अंग्रेजी अनुवाद: जेम्स लेग (1891)। स्रोत

इस श्लोक पर आनंद के साथ चिंतन करें

यह श्लोक आपके मन में क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से आहरण करते हैं और आपके अपने पथ को सम्मान देते हैं।

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