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ताओ ते चिंग 54.1

जो (ताओ का) कुशल रोपक रोपता है वह कभी उखड़ा नहीं जा सकता; जिसे उसकी कुशल भुजाएँ आलिंगन करती हैं, उससे कभी हरा नहीं जा सकता। पुत्र लंबी पंक्ति में लाएँगे, उसके मंदिर को बलिदान।

अंग्रेजी अनुवाद: जेम्स लेगे (1891)। स्रोत

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यह श्लोक आपमें क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से खींचता है और आपके अपने पथ का सम्मान करता है।

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