बेहतर अनुभव के लिए One Source Sangha को इंस्टॉल करें

ताओ ते चिंग 45.1

जो अपनी महान उपलब्धियों को तुच्छ समझता है उसका बल दीर्घकाल तक बना रहता है। महानतम परिपूर्णता को शून्य समझा जाता है, थकान कभी प्रवाह को रोक नहीं पाती। जो सीधा है उसे तुम टेढ़ा समझो; अपनी महानतम कला को मूर्खता समझो, और वाणी को हकलाहट की चीख समझो।

अंग्रेजी अनुवाद: जेम्स लेग (1891)। स्रोत

आनंद के साथ इस श्लोक पर विचार करें

यह श्लोक आपके अंदर क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से लेते हैं और आपके अपने मार्ग को सम्मानित करते हैं।

हमारे साथ चलें

हर रविवार एक पाठ, एक प्रश्न। कुछ और नहीं, कभी नहीं।

🌐 English  ·  हिन्दी