बेहतर अनुभव के लिए One Source Sangha को इंस्टॉल करें

ताओ ते चिंग 39.3

इस प्रकार गरिमा अपनी (दृढ़) जड़ को अपनी (पूर्ववर्ती) नम्रता में पाती है, और जो ऊँचा है वह उस नीचाई में अपनी स्थिरता पाता है (जिससे वह उठता है)। इसलिए राजकुमार और राजा अपने आप को 'अनाथ,' 'छोटे सद्गुण वाले मनुष्य,' और 'बिना कपोल वाले रथ' कहते हैं। क्या यह इस बात की स्वीकृति नहीं है कि अपने आप को नम्र समझकर वे अपनी गरिमा की नींव देखते हैं? यह है कि रथ के विभिन्न भागों की गणना में हम उस पर नहीं आते जो इसे रथ के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए बनाता है। वे स्वयं को जेड जैसा सुंदर दिखना नहीं चाहते, बल्कि (सामान्य) पत्थर जैसा कठोर दिखना पसंद करते हैं।

अंग्रेजी अनुवाद: जेम्स लेगे (1891)। स्रोत

आनंद के साथ इस श्लोक पर ध्यान दें

यह श्लोक आपमें क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से निकालते हैं और आपके अपने मार्ग का सम्मान करते हैं।

हमारे साथ चलें

एक अंश, एक प्रश्न, हर रविवार। कुछ और नहीं, कभी नहीं।

🌐 English  ·  हिन्दी