बेहतर अनुभव के लिए One Source Sangha इंस्टॉल करें

ध्यान 5.14

कारण और तर्कसंगत शक्ति ऐसी शक्तियां हैं जो स्वयं से और अपने स्वयं के उचित कार्यों से संतुष्ट रहती हैं। और उनकी पहली प्रवृत्ति और गति के संबंध में, वे स्वयं से लेती हैं। किंतु उनकी प्रगति सीधे लक्ष्य और उद्देश्य की ओर है, जो उनके मार्ग में है, जैसे कि, और ठीक उनके सामने निहित है: अर्थात्, जो संभव और व्यावहारिक है, चाहे वह हो जो उन्होंने पहले अपने लिए प्रस्तावित किया है या नहीं। इसी कारण से ऐसी क्रियाओं को κατορθώσεις कहा जाता है, जिससे वह मार्ग सीधा हो जिसके द्वारा उन्हें प्राप्त किया जाता है। कोई भी वह चीज़ नहीं मानी जानी चाहिए जो किसी मनुष्य की है, जो उसके लिए मनुष्य के रूप में नहीं है। ये, उद्देश्यों के परिणाम, मनुष्य में आवश्यक चीजें नहीं हैं। मनुष्य की प्रकृति किसी भी ऐसी चीजों का दावा नहीं करती। कार्यों के अंतिम लक्ष्य और समापन मनुष्य की प्रकृति के लिए बिल्कुल भी कुछ नहीं हैं। अतः मनुष्य का लक्ष्य, या वह _summum bonum_ जिसके द्वारा वह लक्ष्य पूरा होता है, प्रस्तावित और इरादे से किए गए कार्यों के समापन में निहित नहीं हो सकता। फिर से, इन बाहरी सांसारिक चीजों के संबंध में, यदि ऐसा हो कि उनमें से कोई मनुष्य के लिए ठीक से संबंधित हो, तो यह मनुष्य के लिए संबंधित नहीं होगा, उन्हें निंदा करना और उनके विरोध में खड़ा होना। न ही वह प्रशंसनीय होगा जो उनके बिना रह सकता है; या अच्छा, (यदि ये वास्तव में अच्छे होते) जो स्वेच्छा से स्वयं को उनमें से किसी वंचित कर देता है। किंतु हम विपरीत देखते हैं, कि जितना अधिक कोई व्यक्ति स्वयं को उन चीजों से अलग करता है जिनमें बाहरी भव्यता और महानता होती है, या किसी अन्य समान चीज़ से; या जितना अच्छा वह इन चीजों के नुकसान को सहन करता है, उतना ही अच्छा माना जाता है।

अंग्रेजी अनुवाद: Meric Casaubon (1634)। स्रोत

Ananda के साथ इस अंश पर विचार करें

यह अंश आपके भीतर क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — Ananda कई परंपराओं से प्रेरणा लेता है और आपके अपने पथ का सम्मान करता है।

हमारे साथ चलें

एक अंश, एक प्रश्न, हर रविवार। कुछ और नहीं, कभी नहीं।

🌐 English  ·  हिन्दी