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धम्मपद 9.7

कोई भी मनुष्य भलाई को हल्के में न समझे, अपने मन में यह न सोचे कि यह मेरे पास नहीं आएगी। जल की बूंदों के गिरने से भी घड़ा भर जाता है; बुद्धिमान व्यक्ति भी धीरे-धीरे भलाई को इकट्ठा करके पूर्ण हो जाता है।

अंग्रेजी अनुवाद: एफ. मैक्स मुलर (1881)। स्रोत

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