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धम्मपद 8.7

यदि कोई मनुष्य सौ वर्षों तक वन में अग्नि की पूजा करे, और यदि वह केवल एक क्षण के लिए एक ऐसे मनुष्य को सम्मान दे जिसकी आत्मा सच्चे ज्ञान में स्थिर है, तो वह सम्मान सौ वर्षों के यज्ञ से बेहतर है।

अंग्रेजी अनुवाद: एफ. मैक्स मुलर (1881)। स्रोत

इस श्लोक पर आनंद के साथ चिंतन करें

यह श्लोक आपमें क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से लाभ लेता है और आपके स्वयं के पथ को सम्मानित करता है।

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