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धम्मपद 7.10

वन आनंददायक हैं; जहाँ संसार को कोई आनंद नहीं मिलता, वहाँ विरागी को आनंद मिलेगा, क्योंकि वे सुखों की खोज नहीं करते।

अंग्रेजी अनुवाद: एफ. मैक्स मुलर (1881)। स्रोत

आनंद के साथ इस श्लोक पर चिंतन करें

यह श्लोक आपके भीतर क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से ज्ञान लेते हैं और आपके अपने पथ का सम्मान करते हैं।

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