धम्मपद 6.3
बुरे कर्मों वाले लोगों को मित्र न बनाओ, नीच लोगों को मित्र न बनाओ: सदाचारी लोगों को मित्र बनाओ, सर्वश्रेष्ठ पुरुषों को मित्र बनाओ।
अंग्रेज़ी अनुवाद: एफ़. मैक्स मूलर (1881)। स्रोत
आनंद के साथ इस श्लोक पर विचार करें
यह श्लोक आपके मन में क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से लेते हैं और आपके अपने मार्ग का सम्मान करते हैं।