बेहतर अनुभव के लिए One Source Sangha इंस्टॉल करें

धम्मपद 5.3

"ये पुत्र मेरे हैं, और यह धन मेरा है," ऐसे विचारों से एक मूर्ख व्यथित होता है। वह स्वयं अपना नहीं है; तो फिर पुत्र और धन कैसे उसके हो सकते हैं?

अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881)। स्रोत

Ananda के साथ इस श्लोक पर विचार करें

यह श्लोक आपमें क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — Ananda कई परंपराओं से ज्ञान लेते हैं और आपके अपने मार्ग का सम्मान करते हैं।

🌐 English  ·  हिन्दी