धम्मपद 5.12
एक बुरा कर्म, नई खींची गई दूध की तरह, (अचानक) नहीं बदलता; जलती हुई आग की तरह, राख से ढकी हुई, वह मूर्ख का अनुसरण करती है।
अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881). स्रोत
अनंद के साथ इस श्लोक पर विचार करें
यह श्लोक आपके भीतर क्या जागृत करती है? कुछ भी पूछें — अनंद कई परंपराओं से खींचता है और आपके अपने पथ का सम्मान करता है।