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धम्मपद 4.9

किंतु, एक सुंदर फूल की तरह, रंग से भरा और सुगंध से भरा, वह सुंदर और फलदायक शब्द हैं उसके जो इसके अनुसार कार्य करता है।

अंग्रेजी अनुवाद: एफ. मैक्स मूलर (1881)। स्रोत

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यह श्लोक आपके भीतर क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से खींचते हैं और आपके अपने पथ को सम्मानित करते हैं।

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