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धम्मपद 4.6

जैसे मधुमक्खी फूल को नुकसान पहुँचाए बिना, उसके रंग या सुगंध को बदले बिना अमृत संचित करती है, वैसे ही एक ऋषि को अपने गाँव में निवास करना चाहिए।

अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881)। स्रोत

आनंद के साथ इस श्लोक पर मनन करें

यह श्लोक आपमें क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से लेते हैं और आपके अपने मार्ग का सम्मान करते हैं।

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