धम्मपद 3.6
यदि किसी व्यक्ति के विचार अस्थिर हों, यदि वह सत्य नियम को न जानता हो, यदि उसका मन अशांत हो, तो उसका ज्ञान कभी पूर्ण नहीं होगा।
अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881)। स्रोत
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