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धम्मपद 3.4

बुद्धिमान पुरुष अपने विचारों की रक्षा करे, क्योंकि वे समझने में कठिन हैं, बहुत चतुर हैं, और वे जहाँ चाहें वहाँ दौड़ते हैं: सुरक्षित विचार सुख लाते हैं।

अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881)। स्रोत

आनंद के साथ इस श्लोक पर चिंतन करें

यह श्लोक आपमें क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से खींचते हैं और आपके अपने मार्ग का सम्मान करते हैं।

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