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धम्मपद 26.5

सूर्य दिन में उज्ज्वल है, चाँद रात में चमकता है, योद्धा अपने कवच में उज्ज्वल है, ब्राह्मण अपने ध्यान में उज्ज्वल है; किंतु बुद्ध, जागृत, दिन और रात दोनों में तेज से उज्ज्वल हैं।

अंग्रेजी अनुवाद: एफ. मैक्स मूलर (1881)। स्रोत

आनंद के साथ इस श्लोक पर विचार करें

यह श्लोक आपमें क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से ज्ञान लेता है और आपके अपने मार्ग का सम्मान करता है।

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