One Source Sangha को स्थापित करें और बेहतर अनुभव लें

धम्मपद 26.33

मैं उसे सच में ब्राह्मण कहता हूँ जो इस संसार में सभी इच्छाओं को त्यागकर, बिना घर के घूमता है, और जिसमें सभी कामना शांत हो गई है।

अंग्रेजी अनुवाद: एफ. मैक्स मूलर (1881)। स्रोत

इस श्लोक पर आनन्द के साथ विचार करें

यह श्लोक आपके मन में क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — आनन्द कई परंपराओं से मार्गदर्शन लेते हैं और आपके अपने पथ का सम्मान करते हैं।

हमारे साथ चलें

एक मार्ग, एक प्रश्न, हर रविवार। कुछ और नहीं, कभी नहीं।

🌐 English  ·  हिन्दी