धम्मपद 26.12
हे मूर्ख! बटी हुई केश का क्या उपयोग, बकरे की खाल का वस्त्र क्या है? तुम्हारे भीतर लोभ है, परंतु बाहर तुम स्वयं को शुद्ध बनाते हो।
अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881)। स्रोत
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