धम्मपद 25.10
हे भिक्षु, इस नाव को खाली करो! यदि खाली हो जाए, तो यह तेजी से चलेगी; राग और द्वेष को काटकर तुम निर्वाण को प्राप्त होगे।
अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881). स्रोत
इस श्लोक पर आनंद के साथ विचार करें
यह श्लोक आपके भीतर क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से प्रेरणा लेते हैं और आपके अपने पथ का सम्मान करते हैं।