धम्मपद 24.7
नहरें सर्वत्र बहती हैं, वासना की बेल उगी हुई खड़ी है; यदि तुम बेल को उगते हुए देखो, तो ज्ञान के माध्यम से इसकी जड़ को काट दो।
अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881)। स्रोत
आनंद के साथ इस श्लोक पर विचार करें
यह श्लोक आपमें क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से निकालते हैं और आपके अपने मार्ग का सम्मान करते हैं।