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धम्मपद 21.11

गोतम के शिष्य सदा जागरूक रहते हैं, और उनका मन दिन-रात सदा करुणा में आनंदित रहता है।

अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881)। स्रोत

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