धम्मपद 20.5
`सभी निर्मित वस्तुएं नष्ट हो जाती हैं,' जो यह जानता है और देखता है वह दर्द में निष्क्रिय हो जाता है; यह पवित्रता का मार्ग है।
अंग्रेजी अनुवाद: एफ. मैक्स मुलर (1881)। स्रोत
आनंद के साथ इस श्लोक पर विचार करें
यह श्लोक आपमें क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से लेते हैं और आपके अपने पथ का सम्मान करते हैं।