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धम्मपद 2.6

मूर्ख व्यर्थता का अनुसरण करते हैं, दुष्ट बुद्धि वाले मनुष्य। बुद्धिमान पुरुष ईर्ष्य को अपना सर्वश्रेष्ठ रत्न मानते हैं।

अंग्रेजी अनुवाद: एफ. मैक्स मुलर (1881)। स्रोत

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यह श्लोक आपके भीतर क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से लेते हैं और आपके अपने पथ का सम्मान करते हैं।

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