धम्मपद 18.6
जैसे लोहे से निकली खोट लोहे को ही नष्ट कर देती है; वैसे ही किसी अपराधी के कर्म उसे दुर्गति की ओर ले जाते हैं।
अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881)। स्रोत
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