बेहतर अनुभव के लिए One Source Sangha इंस्टॉल करें

धम्मपद 18.19

यदि कोई मनुष्य दूसरों की खामियों पर नज़र रखता है और हमेशा अपमानित होने की ओर झुका रहता है, तो उसके अपने दोष बढ़ते हैं, और वह दोषों का विनाश करने से बहुत दूर है।

अंग्रेजी अनुवाद: एफ. मैक्स मुलर (1881)। स्रोत

इस श्लोक पर आनंद के साथ विचार करें

यह श्लोक आपके अंदर क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से लेते हैं और आपके अपने पथ का सम्मान करते हैं।

हमारे साथ चलें

हर रविवार एक अंश, एक प्रश्न। और कुछ नहीं, कभी नहीं।

🌐 English  ·  हिन्दी