बेहतर अनुभव के लिए One Source Sangha को इंस्टॉल करें

धम्मपद 18.1

तुम अब एक सूखे पत्ते की तरह हो, मृत्यु के दूत (यम) तुम्हारे पास आ गए हैं; तुम अपनी यात्रा के द्वार पर खड़े हो, और तुम्हारे पास अपनी यात्रा के लिए कोई साधन नहीं है।

अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881)। स्रोत

इस श्लोक पर Ananda के साथ विचार करें

यह श्लोक आपके अंदर क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — Ananda कई परंपराओं से खींचता है और आपके अपने पथ को सम्मान देता है।

🌐 English  ·  हिन्दी