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धम्मपद 17.8

न कभी था, न कभी होगा, न अभी है, कोई ऐसा व्यक्ति जिसकी सदा निंदा हो, या कोई ऐसा व्यक्ति जिसकी सदा प्रशंसा हो।

अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881)। स्रोत

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