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धम्मपद 16.6

कामना से दुःख आता है, कामना से भय आता है; जो कामना से मुक्त है, वह न तो दुःख जानता है और न ही भय।

अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881)। स्रोत

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