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धम्मपद 15.9

जो एकांत और शांति की मिठास का स्वाद चखता है, वह भय और पाप से मुक्त है, जबकि वह धर्म के अमृत को पीने की मिठास का आनंद लेता है।

अंग्रेजी अनुवाद: एफ. मैक्स मुलर (1881)। स्रोत

अनंद के साथ इस श्लोक पर चिंतन करें

यह श्लोक आपमें क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — अनंद कई परंपराओं से प्रेरणा लेते हैं और आपके अपने पथ का सम्मान करते हैं।

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