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धम्मपद 15.10

आर्यों (तत्वज्ञानियों) का दर्शन शुभ है, उनके साथ रहना सदैव सुख है; यदि कोई मनुष्य मूर्खों को न देखे, तो वह सच में सुखी होगा।

अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881)। स्रोत

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