बेहतर अनुभव के लिए One Source Sangha इंस्टॉल करें

धम्मपद 14.6

जागृत लोग धैर्य को सर्वोच्च तपस्या कहते हैं, दीर्घसहनशीलता को सर्वोच्च निर्वाण कहते हैं; क्योंकि जो दूसरों को मारता है वह साधु (प्रव्रजित) नहीं है, जो दूसरों का अपमान करता है वह श्रमण नहीं है।

अंग्रेजी अनुवाद: एफ. मैक्स मूलर (1881)। स्रोत

इस श्लोक पर आनंद के साथ चिंतन करें

यह श्लोक आपमें क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से लेते हैं और आपके अपने पथ का सम्मान करते हैं।

हमारे साथ चलें

एक मार्ग, एक प्रश्न, हर रविवार। कुछ और नहीं, कभी नहीं।

🌐 English  ·  हिन्दी