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धम्मपद 14.5

कोई पाप न करना, अच्छा कार्य करना, और अपने मन को शुद्ध करना, यह (सभी) जागृत मनों की शिक्षा है।

अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881)। स्रोत

इस श्लोक पर आनंद के साथ मनन करें

यह श्लोक आपमें क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से ज्ञान लेते हैं और आपके अपने पथ का सम्मान करते हैं।

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