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धम्मपद 13.11

गैर-दानशील लोग देवताओं की दुनिया में नहीं जाते; केवल मूर्ख ही दान की प्रशंसा नहीं करते; एक बुद्धिमान व्यक्ति दान में आनन्दित होता है, और इसके माध्यम से परलोक में आशीर्वादित होता है।

अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881)। स्रोत

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यह श्लोक आपके अंदर क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से ज्ञान लेते हैं और आपके अपने पथ का सम्मान करते हैं।

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