बेहतर अनुभव के लिए One Source Sangha को इंस्टॉल करें

धम्मपद 11.3

यह शरीर व्यर्थ है, रोगों से भरा है, और कमजोर है; यह भ्रष्ट ढेर टुकड़े-टुकड़े हो जाता है, जीवन वास्तव में मृत्यु में समाप्त होता है।

अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881)। स्रोत

Ananda के साथ इस श्लोक पर विचार करें

यह श्लोक आपके मन में क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — Ananda कई परंपराओं से जुड़ता है और आपके अपने पथ का सम्मान करता है।

हमारे साथ चलें

एक मार्ग, एक प्रश्न, हर रविवार। कुछ और नहीं, कभी नहीं।

🌐 English  ·  हिन्दी