धम्मपद 11.3
यह शरीर नष्ट है, बीमारी से भरा है, और कमजोर है; यह भ्रष्टाचार का ढेर टुकड़ों में टूट जाता है, जीवन वास्तव में मृत्यु में समाप्त होता है।
अंग्रेजी अनुवाद: एफ. मैक्स मूलर (1881)। स्रोत
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यह श्लोक आपमें क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से लेते हैं और आपके अपने मार्ग का सम्मान करते हैं।