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धम्मपद 11.2

इस सजे हुए ढेर को देखो, घावों से ढका हुआ, एक साथ जुड़ा हुआ, बीमार, कई विचारों से भरा, जिसमें कोई शक्ति नहीं है, कोई पकड़ नहीं है!

अंग्रेजी अनुवाद: F. Max Müller (1881)। स्रोत

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