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धम्मपद 1.18

गुणवान व्यक्ति इस संसार में सुखी है, और वह अगले संसार में भी सुखी है; वह दोनों में सुखी है। वह उस भलाई के बारे में सोचते हुए सुखी है जो उसने की है; वह भले पथ पर चलते हुए और भी अधिक सुखी है।

अंग्रेजी अनुवाद: एफ. मैक्स मूलर (1881)। स्रोत

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यह श्लोक आपके भीतर क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — आनन्द कई परंपराओं से प्रेरणा लेते हैं और आपके अपने पथ का सम्मान करते हैं।

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